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भाग-२


जल प्रदूषण के खतरे क्या हैं? 

पानी, जो जीवन का सार है, प्रदूषण के कारण खतरे में है, जिससे यह एक भयंकर अपत्ती बन गया है। प्रदूषित पानी न केवल हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता हैं, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, अर्थव्यवस्था को कमजोर करता है और यदि हम इसे पीते हैं, खाना पकाने में या रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। इन तात्कालिक खतरों को समझना ही उन्हें रोकने की दिशा में पहला कदम है।
 
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: 

जल जनित बीमारियाँ: 
जीवाणु, विषाणु और परजीवी से दूषित पानी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। हालाँकि, खराब स्वच्छता, अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे से होने वाली इन जलजनित बीमारियों की रोकथाम और निवारक उपायों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। 

    • दस्त संबंधी बीमारियाँ: गंदा पानी तीव्र जठरांत्रशोथ (अक्युट गॅस्ट्रोएन्ट्रायटिस) और हैजा (कॉलेरा) जैसी जैसे संक्रमणों का कारण बनता है जिससे शरीर में पानी की कमी और गंभीर बीमारी हो सकती है।
    • पेचिश: दस्त के इस गंभीर रूप में मल में रक्त और बलगम शामिल होता है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकता है।
    • जियार्डियासिस: एक परजीवी संक्रमण जो दस्त, पेट में ऐंठन और मतली का कारण बनता है।
    • हेपेटाइटिस ए: यह एक वायरस संक्रमण है जो दूषित पीने के पानी और खाना बनाने के पानी के माध्यम से फैलता है और यकृत में सूजन और जलन उत्पन्न करता है।
    • टाइफाइड का बुखार: एक जीवाणु संक्रमण जो गंदे पानी से फैलता है, खासकर उन इलाकों में जहाँ सफाई की व्यवस्था खराब होती है।
 


अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ: 
दूषित पानी केवल तात्कालिक खतरा नहीं है — यह लंबे समय तक चलने वाले और अक्सर अपरिवर्तनीय प्रभाव भी छोड़ता है:

• आर्सेनिकोसिस: 
लंबे समय तक आर्सेनिक से दूषित पानी (खासकर भूमिगत जल) के संपर्क में रहने से त्वचा को नुकसान, आंतरिक अंगों का नुकसान और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
 
• सीसा विषाक्तता: 
पुराने प्लंबिंग सिस्टम से निकलने वाला सीसा बच्चों में गंभीर विकासात्मक, स्वभाव संबंधी और नसों से संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकता है। वयस्कों में यह उच्च रक्तचाप, गुर्दे की समस्याएँ, हृदय संबंधी समस्याएं और प्रजनन से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। जिन घरों में पुराने प्लंबिंग सिस्टम और सीसे की पाइपें लगी होती हैं, वहाँ खतरा ज्यादा होता है। जब पानी लंबे समय तक इन पाइपों में ठहरा रहता है, तो पानी में सीसा छोड़ सकता है और पीने के पानी को प्रदूषित कर सकता है। 
 
• यकृत और गुर्दे को नुकसान: 
भारी धातुएँ जैसे सीसा और कैडमियम और अन्य हानिकारक रसायन जैसे आर्सेनिक, कच्चा तेल आदि धीरे-धीरे यकृत और गुर्दों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुँचाते हैं।
 
• तंत्रिका संबंधी विकार: 
कुछ रसायनों या विषाक्त पदार्थों, जिनमें भारी धातुएं जैसे सीसा और पारा शामिल हैं, के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हमारे नसों के प्रणाली पर विषाक्त प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव बच्चों और वयस्कों दोनों पर पड़ सकता है। जल प्रदूषण से जुड़ी नसों के प्रणाली की समस्याएँ हैं: 
    1. कँपकँपी  
    2. परिधीय न्यूरोपैथी (परिधीय नसों की विकृति)
    3. याददाश्त में कमी और मूड स्विंग्स (मनःस्थिति में अक्सर अचानक होने वाला परिवर्तन)
    4. सीखने में कठिनाई और विकास (उन्नति) में देरी
    5. सीखने में कठिनाई और विकास (उन्नति) में देरी
    6. सीखने में कठिनाई और विकास (उन्नति) में देरी
 
 
• प्रजनन संबंधी समस्याएं: 
प्रदूषित जल से अंतःस्रावी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों, कीटनाशकों, भारी धातुओं, आर्सेनिक आदि के लंबे समय तक संपर्क में रहने से पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, जैसे:
    1. एंडोमेट्रियोसिस और फायब्रॉइड्स
    2. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
    3. गर्भावस्था की जटिलताएं
    4. महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा
    5. पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता में कमी
    6. पुरुषों में वृषण कैंसर का खतरा
 
• विकास संबंधी विषमताएं: 
गर्भावस्था के दौरान विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से जन्मजात विकलांगताएँ और विकास में विलम्ब हो सकता है।
 
• हृदय संबंधी समस्याएँ:
प्रदूषित पानी के सेवन के माध्यम से विषाक्त रसायनों, भारी धातुओं आदि के लंबे समय तक संपर्क में रहना हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह एंडोथेलियल डिसफंक्शन (एंडोथेलियल डिसफंक्शन एक ऐसी स्थिति है जिसमें छोटी धमनियों की आंतरिक परत के कार्य में खराबी होती है), ऑक्सीडेटिव तनाव (शरीर में असंतुलन), सूजन और जलन आदि जैसे विभिन्न तंत्रों के माध्यम से हृदय रोगों, स्ट्रोक और हृदय गति रुकना, इन जोखिमों को बढ़ाता है।
 
• श्वसन संबंधी समस्याएँ:
प्रदूषित पानी में रसायन, जीवाणु और एलर्जन्स जैसे प्रदूषक होते हैं। इन विषाक्त पदार्थों के हवा में मिश्रित होने से अस्थमा का दौरा पड़ सकता है या श्वसन नलिकाओं को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे क्रॉनिक ब्रोन्काइटिस (श्वसन नलिकाओं में सूजन और बलगम का जमा होना) जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
 
• त्वचा संबंधी समस्याएँ:
प्रदूषित पानी से रैशेज (चकत्ते), एक्जिमा और त्वचा संक्रमण होता हैं, और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
 
 
• कैंसर का खतरा बढ़ जाता है:
आर्सेनिक, भारी धातु, विषाक्त पदार्थ आदि जैसे प्रदूषकों से दूषित पानी का लंबे समय तक सेवन करने से त्वचा, मूत्राशय, फेफड़े, गुर्दे और यकृत कैंसर सहित विभिन्न कैंसर विकसित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
 


पर्यावरणीय प्रभाव:

• जलीय आवासों का नुकसान: 
जल प्रदूषण जलीय जीवन को नष्ट कर देता है। कारखानों से उत्पन्न कचरा, कृषि से उत्पन्न कूड़ा और मलप्रवाह के नाले जल निकायों को दूषित करते हैं, जिससे वे मछली और अन्य प्रजातियों के लिए अनुपयुक्त हो जाते हैं। 

• खाद्य जाल में बदलाव (खाद्य श्रृंखला में बाधा):
विषाक्त प्रदूषण प्रमुख प्रजातियों को मार देता है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है। जब छोटी मछलियाँ ज़हरीले पदार्थों से मर जाती हैं, तो पूरी खाद्य श्रृंखला ध्वस्त हो जाती है, जिससे बड़ी प्रजातियाँ और समुद्री भोजन पर निर्भर मनुष्य भी प्रभावित होते हैं।
  
• हानिकारक शैवाल का प्रस्फुटन (हैब्स):
अत्यधिक खाद और अनुपचारित अपशिष्ट जल के कारण जल निकायों में शैवाल का अत्यधिक विकास हो जाता है। ये शैवाल जल में ऑक्सीजन की मात्रा घटा देते हैं, जिससे जलीय जीवन का दम घुटता है और पानी को मनुष्यो के लिए भी असुरक्षित बना देता है।

 

आर्थिक प्रभाव:
 
• पुनर्स्थापन की उच्च लागत:
प्रदूषित जल निकायों को साफ करना केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं है, बल्कि यह एक महंगी और समय लेने वाली प्रक्रिया भी है। सरकारों और समुदायों को नष्ट हुए पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्स्थापित करने के लिए भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, जो जल प्रदूषण के गंभीर आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है।
 
• पर्यटन और मनोरंजनात्मक विहार में गिरावट:
कचरे और विषाक्त पदार्थों से प्रदूषित समुद्र तट, नदियाँ और झीलें अपनी सुंदरता और आकर्षण खो देती हैं। ऐसे स्थानों से पर्यटक दूरी बना लेते हैं, जिससे स्थानीय व्यवसायों और समुदायों को भारी आर्थिक नुकसान होता है।
  

• मत्स्य उद्योग पर प्रभाव:
प्रदूषित जल से मछलियों की संख्या कम हो जाती है, जिससे रोजगार के अवसर और खाद्य आपूर्ति दोनों में कमी आ जाती है। मत्स्य उद्योग का पतन हो जाता है, जिससे लाखों लोगों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
 
• स्वास्थ्य सेवा लागत में वृद्धि:
जल प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संख्या, दवाओं पर खर्च और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे यह समस्या व्यक्तियों और सरकारों दोनों के लिए बहुत महंगी साबित होती है।
 
 
 
जल प्रदूषण से संबंधित खतरों के विरुद्ध निवारक और सुरक्षात्मक उपाय:

निवारक उपाय: 

1. जल प्रदूषण को रोकना: 
    • प्लास्टिक, रसायन या तेल को कभी भी सीधे नालियों या नदियों, झीलों आदि जैसे जल निकायों में  न डालें।
    • घरों और व्यावसायिक परिसरों में शौचालयों या सिंक में दवाइयाँ, पेंट या जहरीले पदार्थ न बहाएँ।
    • जल निकायों में रासायनिक बहाव को रोकने के लिए रासायनिक खादों की जगह जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग करें।
 
2. कूड़े-कचरे का सही व्यवस्थापन:
    • कचरा फेंकने से पहले, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जैविक और अजैविक कचरे को अलग  करें।
    • जैविक कचरे को जल स्रोतों में न फेंकें, बल्कि उसे खाद के रूप में उपयोग करें।
    • प्रदूषण को कम करने या न्यूनतम करने के लिए प्लास्टिक और कारखानों द्वारा उत्पन्न हुए कचरे का पुन:प्रयोग (रिसायकल) करें।
 

3. कारखाने और नाली के गंदे पानी का सुरक्षित निपटान:
    • सुनिश्चित करें कि कारखाने और सीवेज संयंत्र, नदियों और झीलों में विषाक्त निपटान को रोकने के  लिए, सही तरीकों से कचरे पर उपचार करने के दिशानिर्देशों का पालन हो।
    • स्थानीय जल निकायों के प्रदूषण को रोकने के लिए शहर स्तर पर प्रभावी सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित करें।
    • किसी भी रिसाव और प्रदूषण से बचने के लिए घरेलू सेप्टिक टैंक का उचित रखरखाव करें।
 
4. पानी की बर्बादी कम करें:
    • रिसाव को तुरंत ठीक करें: टपकता नल समय के साथ कई गैलन पानी बर्बाद कर सकता है।
    • पानी की बचत करने वाले उपकरणों का उपयोग करें: ऊर्जा बचाने वाले डिशवॉशर, वॉशिंग मशीन और कम बहाव वाले नल का उपयोग करें।
    • वर्षा जल संचयन करें: सफाई और बागवानी जैसे गैर-पीने के पानी के कामों के लिए बारिश का  पानी इकट्ठा करें।
    • टिकाऊ सिंचाई करें: पानी के अत्यधिक खपत को कम करने के लिए खेती में ड्रिप सिंचाई पद्धति को प्रोत्साहित करें।
 
 
 
सुरक्षात्मक उपाय

1. सुरक्षात्मक उपाय: 
    • सुरक्षित पानी पिएं: हमेशा फ़िल्टर किया हुआ, शुद्ध किया हुआ या उबला हुआ पानी पिएं।
    • उन्नत फ़िल्टरेशन का उपयोग करें: अगर संभव हो, तो हानिकारक दूषित पदार्थों को हटाने में मदद करने के लिए आर.ओ या यूवी वॉटर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
    • धोने, नहाने, बागवानी आदि के दौरान सुरक्षित उपयोग के लिए बारिश का पानी साफ, ढके हुए  कंटेनरों में जमा करें।

2. व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता बनाए रखें:
    • साबुन और साफ पानी से अक्सर हाथ धोएं, खासकर खाने से पहले, शौचालय का उपयोग करने के बाद, आदि।
    • जहाँ तक संभव हो, दूषित या प्रदूषित जल निकायों में स्नान करना टालें।
    • मच्छरों और जीवाणुओं के प्रजनन को रोकने के लिए आस-पास के वातावरण को साफ और  स्वच्छ रखें।
 
3. सामुदायिक जागरूकता और सहभागिता बढ़ाएं:
    • समुदायों को स्वच्छ पानी और प्रदूषण की रोकथाम के महत्व के बारे में समझाएं।
    • सफाई अभियान आयोजित करें: नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों को साफ करने के प्रयासों के लिए स्वेच्छा से हिस्सा लें।
 
4. सरकारी नियमों का समर्थन करें और उनका पालन करें:
    • कारखानों द्वारा गंदा पानी फेंकने पर रोक लगाने वाले सरकारी नियमों का पालन करें और उनका समर्थन करें।
    • लोगों को सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल संरक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
    • पर्यावरण के अनुकूल व्यवसायों का समर्थन करें जो टिकाऊ, जल-सुरक्षित उत्पादन तरीकों का पालन करते हैं।
 
इन उपायों को अपनाकर, हम जल प्रदूषण को रोक सकते हैं और अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को इसके हानिकारक प्रभावों से बचा सकते हैं।

 

 

REFERENCES:
    1. https://www.nrdc.org/stories/water-pollution-everything-you-need-know#causes
    2. https://bbrc.in/wp-content/uploads/2021/03/053-WATER-POLLUTION-IN-INDIA-CAUSES.pdf
    3. https://www.frontiersin.org/journals/environmental-science/articles/10.3389/fenvs.2022.880246/full
    4. https://online.ecok.edu/articles/causes-of-water-pollution/
    5. https://www.medicalnewstoday.com/articles/water-pollution-and-human-health
    6. https://www.niehs.nih.gov/health/topics/agents/water-poll
    7. https://www.epa.gov/p2/pollution-prevention-tips-water-conservation
    8. https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1814499
    9. https://theiashub.com/upsc/upsc-notes/water-pollution-in-india/
    10. https://www.careinsurance.com/blog/health-insurance-articles/adverse-effects-of-water-pollution-on-human-health

 

     


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